नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के डिजिटल ढांचे की खुलकर प्रशंसा की और इसे दुनिया के लिए अनोखा मॉडल बताया। अपने संबोधन की शुरुआत “नमस्ते” से करते हुए उन्होंने कहा कि इस शानदार शहर नई दिल्ली में आकर उन्हें खुशी है और यह सम्मेलन भविष्य की तकनीक पर वैश्विक सहयोग का मंच है।
मुंबई के स्ट्रीट वेंडर की कहानी
मैक्रों ने अपने भाषण में मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर का उदाहरण देते हुए कहा कि जो व्यक्ति दस वर्ष पहले बैंक खाता नहीं खोल पाता था, वह आज डिजिटल भुगतान का सहज उपयोग कर रहा है। उनके अनुसार यह केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की कहानी है।
डिजिटल इंडिया मॉडल की सराहना
उन्होंने कहा कि भारत ने 140 करोड़ लोगों के लिए डिजिटल पहचान प्रणाली विकसित की है, हर महीने लगभग 20 अरब डिजिटल लेनदेन हो रहे हैं, और करीब 50 करोड़ नागरिकों को डिजिटल हेल्थ आईडी जारी की जा चुकी है। मैक्रों ने इसे “ओपन और इंटरकनेक्टेड डिजिटल सिस्टम” बताते हुए कहा कि ऐसा समेकित मॉडल दुनिया में कहीं और नहीं है।
एआई सहयोग पर भारत-फ्रांस साझेदारी
राष्ट्रपति ने पिछले वर्ष पेरिस में आयोजित एआई एक्शन समिट का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और फ्रांस ने मिलकर ऐसी तकनीकों के लिए वैश्विक दिशा तय करने की कोशिश की है जो स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन और कृषि जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख क्षेत्र बन चुकी है, लेकिन जिम्मेदार नवाचार का रास्ता अभी भी खुला है।
भारत की एआई रणनीति की सराहना
मैक्रों ने भारत की उस पहल को भी सराहा जिसमें स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सस्ती दरों पर हजारों सरकारी-समर्थित जीपीयू उपलब्ध कराए जा रहे हैं और छोटे, विशिष्ट कार्यों के लिए भाषा मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार यह “सॉवरेन टेक्नोलॉजी चॉइस” का उदाहरण है।
अंतिम संदेश
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि एआई केवल बड़ी शक्तियों का खेल है, लेकिन भारत, फ्रांस और उनके साझेदार मिलकर ऐसा भविष्य बना सकते हैं जिसमें नवाचार, जिम्मेदारी और मानवता साथ-साथ चलें।
निष्कर्ष:
मैक्रों का बयान न केवल भारत की डिजिटल उपलब्धियों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि आने वाले वर्षों में एआई क्षेत्र में भारत-फ्रांस सहयोग वैश्विक तकनीकी परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।
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