कूटनीतिक वार्ता जारी, पर सैन्य तैनाती ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
रिपोर्ट: All Media Press Association अंतरराष्ट्रीय डेस्क
मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के आसपास अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की तैनाती बढ़ा दी है, जिससे संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका तेज हो गई है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब जिनेवा में दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है।
सूत्रों के अनुसार अमेरिकी सेना ने F-22 और F-35 जैसे स्टील्थ फाइटर जेट सहित कई सहायक विमान जॉर्डन और सऊदी अरब के प्रमुख सैन्य ठिकानों—मुवफ्फक साल्टी एयर बेस और प्रिंस सुल्तान एयर बेस—पर तैनात किए हैं। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी सैन्य तैनाती बड़े स्तर के हवाई अभियान की तैयारी का संकेत देती है।
हाल ही में दिए बयान में डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि वार्ता विफल होती है तो परिणाम गंभीर होंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित कार्रवाई का लक्ष्य केवल ईरान का परमाणु कार्यक्रम होगा या व्यापक रणनीतिक उद्देश्य भी शामिल होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नौसेना ने भी मध्य-पूर्व और पूर्वी भूमध्य क्षेत्र में कई युद्धपोत भेजे हैं ताकि किसी भी संभावित अभियान में समुद्री समर्थन मिल सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सैन्य दबाव वार्ता में बढ़त हासिल करने की रणनीति भी हो सकता है, लेकिन क्षेत्रीय हालात अत्यंत संवेदनशील बने हुए हैं।
विश्लेषण:
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति “उच्च दबाव कूटनीति” का उदाहरण है, जहाँ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन वार्ता को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। फिर भी किसी भी गलत आकलन से व्यापक संघर्ष भड़क सकता है।
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