राष्ट्रीय काव्य संगम महोत्सव में, दिलीप पाण्डेय कृत पुस्तक मैं समय हूंँ का विमोचन
संभल। राष्ट्रीय काव्य संगम महोत्सव का एक दिवसीय भव्य कार्यक्रम, सम्भल स्थित डी के रिसोर्ट में आयोजित किया गया जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया।
इस महोत्सव में पहले सत्र में पंजाब के फगवाड़ा नगर से पधारे साहित्यकार दिलीप कुमार पाण्डेय की पुस्तक "मैं समय हूंँ" का विधिवत विमोचन किया गया। हिन्दू जागृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने इस पुस्तक को समाजोपयोगी बताया।
स्पर्शी पत्रिका के संपादक ख्यातिलब्ध व्यंग्यकार अतुल कुमार शर्मा ने, मैं समय हूंँ नामक काव्य-संग्रह पर अभिव्यक्ति देते हुए कहा कि रचनाकार ने समय को परिवर्तनशील माना है,और अहंकार को नाश करने वाला। मनुष्य को समय के मुताबिक अपने आपको निरंतर आत्मसात करते रहने की आवश्यकता है। डॉ नेहा मलय ने पुस्तक के सामाजिक सरोकारों को लेकर अपनी चर्चा में भौतिकवादी सोच से समाज में पड़ने वाले प्रभाव को रेखांकित किया। अरूण दीक्षित ने पुस्तक के कला पक्ष व भाव पक्ष दोनों को सामंजस्य स्थापित करते हुए दोनों पक्षों की तार्किक व्याख्या की। वहीं दिल्ली से पधारे भागीरथ सिन्हा ने बिम्ब सघनता, जनभाषा का सहज प्रयोग,भाषिक सरलता की शानदार अभिव्यक्ति बताया।
विमोचन के पश्चात, मैं समय हूंँ पुस्तक के लेखक दिलीप कुमार पाण्डेय को हिन्दू जागृति मंच ने स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र देकर सम्मानित भी किया।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी रामानुज, साहित्यिक जगत से योगेश बृजवासी, भागीरथ सिन्हा, प्रमोद तिवारी, प्रेम सागर शर्मा, श्रीपाल शर्मा ईदरीशपुरी, डॉ रामनिवास, उज्ज्वल वशिष्ठ, डॉ फूलचंद विश्वकर्मा,डॉ जयशंकर दुबे आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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