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नरेंद्र मोदी का कनेसेट में गूंजा कड़ा संदेश: हमास की निंदा, आतंक पर शून्य सहिष्णुता; फ़लस्तीन पर शांति का आह्वा

यरूशलम/तेल अवीव। इज़राइल की संसद कनेसेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन कई मायनों में ऐतिहासिक और निर्णायक रहा। “शलोम नमस्ते” से भाषण की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने 7 अक्तूबर 2023 को हुए हमास के हमले को “बर्बर आतंकी कृत्य” करार दिया और साफ शब्दों में कहा, “नागरिकों की हत्या को किसी भी तरह तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता।”

उन्होंने कहा कि भारत इस हमले में मारे गए सभी लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त करता है और पीड़ित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उनके इन शब्दों पर सदन में जोरदार समर्थन देखने को मिला।

आतंकवाद पर दो-टूक

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का रुख अडिग है। उन्होंने 2008 मुंबई हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत भी आतंक की विभीषिका झेल चुका है, जहां निर्दोष भारतीयों के साथ इज़राइली नागरिकों ने भी जान गंवाई थी।
“आतंक की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन उसके खिलाफ हमारी प्रतिबद्धता की भी कोई सीमा नहीं होनी चाहिए,” उन्होंने कहा।

फ़लस्तीन पर संतुलित कूटनीति

कड़े संदेश के साथ पीएम मोदी ने संतुलित कूटनीतिक रुख भी पेश किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की शांति पहलों के समर्थन का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति संवाद और आपसी विश्वास से ही संभव है।
“ग़ज़ा में शांति बहाल होने से फ़लस्तीन के प्रश्न के समाधान की दिशा में सकारात्मक रास्ता खुलेगा,” उन्होंने कहा।

“सिर्फ़ मित्र नहीं, भाई”

इज़राइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने अपने स्वागत भाषण में पीएम मोदी को “सिर्फ़ मित्र नहीं, बल्कि भाई” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना, सहयोग तीन गुना और आपसी समझ चार गुना बढ़ी है।
मोदी के सम्मान में कनेसेट भवन को भारतीय तिरंगे के रंगों में रोशन किया गया, जिसके लिए उन्होंने स्पीकर का आभार जताया।

विपक्षी बहिष्कार पर स्थिति स्पष्ट

कुछ रिपोर्टों में इज़राइली विपक्ष द्वारा बहिष्कार की खबरें सामने आईं। हालांकि विपक्षी नेता याएर लैपिड ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर स्पष्ट किया कि वॉकआउट आंतरिक राजनीतिक कारणों से था और इसका संबंध भारतीय प्रधानमंत्री के संबोधन से नहीं था।

इतिहास, होलोकॉस्ट और साझा मूल्य

प्रधानमंत्री मोदी ने होलोकॉस्ट को मानव इतिहास का “सबसे काला अध्याय” बताते हुए कहा कि ऐसी त्रासदियों से पूरी मानवता को सीख लेनी चाहिए। उन्होंने भारत और इज़राइल की हजारों साल पुरानी सभ्यताओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और नवाचार की परंपरा का उल्लेख करते हुए भविष्य में रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग और गहराने का भरोसा जताया।

मज़बूत संदेश, संतुलित दृष्टि

अपने दो दिवसीय राजकीय दौरे के पहले दिन ही प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता की नीति पर कायम है, साथ ही क्षेत्रीय शांति और फ़लस्तीन के न्यायसंगत समाधान के समर्थन से भी पीछे नहीं हटेगा।

कनेसेट में गूंजा यह संबोधन न केवल भारत–इज़राइल रिश्तों की मजबूती का प्रतीक बना, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की संतुलित, स्पष्ट और प्रभावशाली विदेश नीति का भी सशक्त संदेश दे गया।


 
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Author: Mukesh Kumar Kushwaha

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