जनप्रतिनिधियों की नाकामी से सम्भल–गजरौला रेलवे लाइन आज भी उपेक्षा की शिकार : के.के. मिश्रा सांसद-विधायक जनता को जवाब दें—आख़िर कब मिलेगा बजट? सम्भल। सम्भल–गजरौला रेलवे लाइन के दोहरीकरण का मुद्दा बीते बीस वर्षों से जनता की बुनियादी माँग बना हुआ है, लेकिन क्षेत्र के सांसदों और विधायकों की घोर उदासीनता और अकर्मण्यता के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना आज भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। यह कहना है राष्ट्रीय भ्रष्टाचार दमन परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के.के. मिश्रा का। के.के. मिश्रा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सम्भल के जनप्रतिनिधियों ने संसद और विधानसभा में इस मुद्दे को न तो गंभीरता से उठाया और न ही केंद्र व राज्य सरकार पर बजट के लिए कोई दबाव बनाया। नतीजा यह है कि जनता आज भी जर्जर रेलवे व्यवस्था का दंश झेलने को मजबूर है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य क्षेत्रों की रेलवे परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत हो सकते हैं, तो फिर सम्भल–गजरौला रेलवे लाइन के साथ सौतेला व्यवहार क्यों? क्या सम्भल की जनता ने सांसद और विधायक सिर्फ़ चुनावी भाषण सुनने के लिए चुने हैं? राष्ट्रीय भ्रष्टाचार दमन परिषद ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि अब भी जनप्रतिनिधियों ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी और दोहरीकरण की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो संगठन सड़क से लेकर शासन-प्रशासन तक व्यापक आंदोलन छेड़ने को बाध्य होगा। के.के. मिश्रा ने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि सम्भल की जनता के अधिकारों की लड़ाई है, और यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक सम्भल–गजरौला रेलवे लाइन के दोहरीकरण का कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो जाता।
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