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इंदौर में दूषित पानी पीने से 14 जानें चलीं गयीं. पेयजल में मानव मल-मूत्र मिलने कि आशंका, लैब की जांच में सामने आया सच,

इंदौर- पानी की गुणवत्ता का सच गुरुवार को एमजीएममेडिकलकॉलेज और नगर निगम की लैब में हुई सैंपल जांच रिपोर्ट में सामने आया।  भारत का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में नर्मदा जल सप्लाई के नाम पर नागरिकों को मानव मल-मूत्र मिला पानी पिलाए जाने से 14 लोगों की मौत हुई है। 

 

गुरुवार को पानी की गुणवत्ता का सच एमजीएम मेडिकल कॉलेज और नगर निगम की लैब में हुई सैंपल जांच रिपोर्ट में सामने आया। पानी में ई-कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया मौजूद थे, जो सीधे तौर पर मानव मल में पाए जाते हैं। इस भयावह लापरवाही की पुष्टि स्वयं कलेक्टर शिवम वर्मा ने की है। उधर, गुरुवार को एक और की मौत के साथ ही मरने वालों का आंकड़ा 14 हो गया है।

 

100 से ज्यादा लोग दूषित पानी से बीमार पड़ गए थे.

 

इंदौर में  उस समय हड़कंप मच गया था, जब दूषित पानी से मोहल्ले के 100 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए थे। मंगलवार को आठ लोगों की जान चली गई थी। अब तक करीब 2800 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 201 का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। 32 मरीज आइसीयू में भर्ती हैं, जिनकी दशा गंभीर बताई जा रही है। गुरुवार को भी भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के मरीज सामने आए। हालांकि अधिकांश को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।

 

कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को सहायता राशि के चेक देते समय आक्रोश झेलना पड़ा.

 

गुरुवार को कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चार मृतकों के स्वजन को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि के चेक सौंपे। इस दौरान रहवासियों ने नाराजगी जताई और कहा कि शासन वास्तविक मौतों से कम आंकड़ा मान रहा है। विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है और डायरिया से हुई मौतों की जांच कर सहायता दी जाएगी। इस दौरान उनके आक्रोश को मंत्री को झेलना पड़ा।

मुख्य सचिव से एनएचआरसी ने दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह में मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि खबरों के मुताबिक लोग लगातार दूषित पानी की शिकायत करते रहे , लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

हाई कोर्ट में इस मामले में प्रस्तुत दो जनहित याचिकाओं में शुक्रवार को सुनवाई होगी। उसे कोर्ट में बताना है कि भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड में अब तक कितने मरीज मिले हैं। मरीजों के निशुल्क उपचार की क्या व्यवस्था की गई है। शासन को इन याचिकाओं में स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी है।


 
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Author: Mukesh Kumar Kushwaha

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