*नई दिल्ली अब दूर नहीं*
आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ राज्य
बिजलियां बरसाना बंद कर *अब्र*
टूट चुका है सुवर्णों का *सब्र*।
बहुत दूर नहीं नई दिल्ली
राजस्थान से
*संविधान हेतु*
समर होगा संविधान से।।
सुलगी है जो आग
*एकात्म* का।
जलते रहना चाहिए
*वेदी* प्रयाग का।।
संताने सियारों के
करते *सियासत*।
*सिंहों* की संताने भी
रार करते क्या कभी?
हुकुम* हांथ थामो
मरना मंजूर *मही*
*राणा जी* रण ठानो
*नई दिल्ली* अब दूर नहीं।
आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर
वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि
अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़
tags : छत्तीसगढ़ अंबिकापुर सरगुजा