loader
Breaking News
Foto

पद का घमंड और एक हत्या जिसने व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया: अभिषेक कुमार सोनी

पद का घमंड और एक हत्या जिसने व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया: अभिषेक कुमार सोनी

 

जब अफसर ही कानून तोड़े, तब इंसाफ किससे मांगे जनता?

 

रायपुर/बलरामपुर। बलरामपुर जिले के कुसमी थाना क्षेत्र के हंसपुर गांव में घटित घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल मीडिया प्रेस एसोसिएशन के सरगुजा संभाग अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ राजपुर के प्रवक्ता, संचार टुडे सीजीएमपी न्यूज के छत्तीसगढ़ स्टेट हेड अभिषेक कुमार सोनी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह सत्ता के दुरुपयोग, आदिवासी अधिकारों और कानून के नैतिक पक्ष पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। जिस प्रशासन से आम नागरिक सुरक्षा और न्याय की अपेक्षा करता है, उसी प्रशासनिक ढांचे के एक जिम्मेदार अधिकारी पर हत्या जैसे संगीन आरोप लगना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

खेत में पानी पटाने जैसे सामान्य और जीवनोपयोगी कार्य में लगे तीन आदिवासी ग्रामीणों के साथ एसडीएम जैसे जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा मारपीट, और उसमें एक बुजुर्ग की मौत, यह दर्शाती है कि सत्ता जब संवेदना से कट जाती है, तो कानून भी क्रूर हो जाता है। इस मामले में आरोपी के रूप में कुसमी में पदस्थ करुण कुमार डहरिया का नाम सामने आना, प्रशासनिक व्यवस्था की आत्मा को झकझोर देता है।भारतीय संविधान में कानून के समक्ष समानता की बात कही गई है। ऐसे में पुलिस द्वारा एसडीएम सहित चार आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायिक रिमांड यह संदेश देता है कि पद और प्रभाव कानून से ऊपर नहीं हैं। यह एक सकारात्मक पहलू है, लेकिन केवल गिरफ्तारी से न्याय पूरा नहीं होता। असली परीक्षा निष्पक्ष जांच, पारदर्शी अभियोजन और समयबद्ध न्याय से होगी।

 

घटना के बाद सर्व आदिवासी समाज, स्थानीय ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का सड़कों पर उतरना यह बताता है कि यह मामला केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि समुदाय की सामूहिक पीड़ा है। “हत्यारों को फांसी दो” जैसे नारे कानून की भाषा नहीं हैं, लेकिन वे उस असहाय गुस्से और टूटे भरोसे की अभिव्यक्ति जरूर हैं, जो वर्षों से आदिवासी समाज महसूस करता आ रहा है।यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रशासनिक नैतिकता पर भी फैसला होगा। नहीं, बल्कि जमीन पर भी समान रूप से लागू होता है।

यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की परीक्षा है।हंसपुर की घटना हमें याद दिलाती है कि कानून की ताकत लाठी में नहीं, न्याय में होती है। यदि सत्ता संवेदनहीन हो जाए, तो लोकतंत्र कमजोर पड़ता है। अब यह जिम्मेदारी जांच एजेंसियों और न्यायपालिका पर है कि वे यह साबित करें कि भारत में कानून सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी समान रूप से लागू होता है।


 
foto
Author: KAILASH RAJWADE

Recent News

Top News Viewed

Categories

Upcoming # Events

Events

Conference, Shows & Meets