नई दिल्ली: Pakistan और Afghanistan के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और सीमा पर जारी झड़पों के बीच भारत ने एक बार फिर संयम, संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता की अपनी नीति को मजबूती से आगे बढ़ाया है। जहां एक ओर दोनों देशों के बीच हवाई हमले, ड्रोन कार्रवाई और सीमा पार गोलाबारी की खबरें हैं, वहीं भारत ने साफ किया है कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता सर्वोपरि है।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पक्तिका और खोस्त प्रांतों में झड़पें तेज हुई हैं। पाकिस्तान ने दावा किया है कि कार्रवाई में 330 से अधिक तालिबान लड़ाके मारे गए हैं, जबकि अफगान पक्ष ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इस बीच खैबर पख्तूनख्वा में Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) द्वारा हमलों की खबरें भी सामने आई हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर European Union, United Nations, China और Russia ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
भारत का स्पष्ट संदेश: शांति ही समाधान
भारत ने हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है और साथ ही यह भी दोहराया है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। भारत की “पड़ोसी पहले” नीति और क्षेत्रीय सहयोग की प्रतिबद्धता दक्षिण एशिया में स्थिरता का मजबूत आधार रही है।
भारत ने अतीत में भी संकट की घड़ी में मानवीय सहायता, विकास सहयोग और कूटनीतिक संतुलन के जरिए अपनी जिम्मेदार भूमिका निभाई है। अफगानिस्तान में भारत द्वारा किए गए विकास कार्य — जैसे बांध, संसद भवन और सड़कों का निर्माण — उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा
आज भारत न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक जिम्मेदार और संतुलित शक्ति के रूप में उभरा है। शांति स्थापना, आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ने भारत की साख को मजबूत किया है।
दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत का रुख यह स्पष्ट करता है कि वह संघर्ष नहीं, बल्कि सहयोग और विकास की राह पर विश्वास करता है। क्षेत्रीय अस्थिरता के इस दौर में भारत एक स्थिर, विश्वसनीय और दूरदर्शी नेतृत्व का उदाहरण बनकर सामने आया है।
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