जब सत्य लिखने वाली कलम पर हमले
हों, तब एक अटूट ढाल का होना ज़रूरी
है।"
प्रिय
साथियों,
पत्रकारिता
और समाजसेवा कोई साधारण कार्य नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने, व्यवस्था को आईना दिखाने और सच को सामने लाने का एक जोखिम
भरा जुनून है। मैंने खुद पत्रकारिता के धरातल पर उस कड़वे सच को जिया और अनुभव
किया है, जहाँ जब एक निष्पक्ष पत्रकार किसी घोटाले की परतें खोलता
है या सच दिखाता है, तो सत्ता, व्यवस्था और ताकतवर माफिया उनके जान, माल और सम्मान के दुश्मन बन जाते हैं। सच्चे पत्रकारों और
निडर समाजसेवियों की आवाज़ दबाने के लिए उन पर झूठे मुकदमे थोपे जाते हैं, सुनियोजित बदनामी की जाती है और गहरे षड्यंत्र रचे जाते
हैं।
इतिहास
और वर्तमान गवाह हैं कि जब-जब किसी कलमकार ने सच बोलने का साहस किया, उस पर तंत्र का प्रहार हुआ:
- निडरता का मूल्य: चाहे बिहार के
सीवान में बालू व शराब माफियाओं के खिलाफ लिखने वाले पत्रकार राजदेव रंजन
हों, या
कर्नाटक में निर्भीक आवाज़ उठाने वाली गौरी लंकेश—सच
उजागर करने की कीमत अक्सर जान देकर चुकानी पड़ी है।
- सत्य का संघर्ष: व्यापम घोटाले
जैसे देश के सबसे बड़े घोटालों का सच सामने लाने वाले खोजी पत्रकारों को जिस
तरह धमकियों, मुकदमों
और संदिग्ध परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, वह यह साबित करता है कि निष्पक्ष
पत्रकारिता आज सबसे खतरनाक मोर्चों में से एक बन चुकी है।
-
जब-जब
मैंने इस दर्द,
भय और अकेलेपन को करीब से देखा, तब यह अहसास एक अटूट संकल्प में बदल गया कि देश में एक ऐसा
मजबूत संगठन होना ही चाहिए, जो निष्पक्ष पत्रकारों और
निडर समाजसेवियों के पीछे एक अभेद्य चट्टान बनकर खड़ा हो सके—उनकी सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों और
उनके आत्मसम्मान की रक्षा के लिए।
मेरे प्यारे पत्रकार और समाजसेवी साथियों,
आपकी
कलम और आपकी आवाज में कितनी ताकत है, यह पूरी दुनिया ने देखा है:
- यह आपकी ही
निष्पक्ष और जमीनी पत्रकारिता का असर था जिसने एक सामान्य पृष्ठभूमि से आने
वाले चाय बेचने वाले को देश का प्रधानमंत्री बनने की यात्रा में जन-जन का
चहेता बनाया।
- यह आपकी ही
रिपोर्टिंग की ताकत थी जिसने कभी दिल्ली के रामलीला मैदान से भेष बदलकर
निकलने वाले बाबा रामदेव को देश का स्थापित 'योग गुरु' बना दिया।
- यह आपकी ही
निष्ठा का परिणाम था जब सूचना के अधिकार (RTI) और निडर पत्रकारिता के बल पर 2G घोटाले और
कोयला आवंटन जैसे बड़े-बड़े मामलों का भंडाफोड़ हुआ और भ्रष्ट व्यवस्था को
घुटने टेकने पड़े।
लेकिन
आज एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि जो पत्रकार और समाजसेवी कल तक दूसरों को
षड्यंत्रों से बचाते थे, समाज को न्याय दिलाते थे, आज वे खुद तंत्र और माफियाओं के षड्यंत्रों का शिकार हो
रहे हैं। जब किसी ज़िला या तहसील स्तर के पत्रकार पर झूठा मुकदमा दर्ज होता है या
हमला होता है,
तो वह खुद को असहाय और अकेला पाता
है।
इसी
अकेलेपन को खत्म करने, आपके संघर्षों को ताक़त
देने और आपकी आवाज़ को बुलंद करने के लिए ऑल
मीडिया प्रेस एसोसिएशन (All Media Press Association) की
स्थापना हुई है।
हमारा दृढ़ संकल्प:
- कानूनी व सामाजिक सुरक्षा: किसी भी सच्चे
पत्रकार या समाजसेवी पर होने वाले अन्याय, झूठे मुकदमों और अत्याचार के खिलाफ
हमारी संस्था कानूनी और सामाजिक स्तर पर ढाल बनकर खड़ी रहेगी।
- अखंड एकजुटता: हम देश के
कोने-कोने में काम कर रहे पत्रकारों और समाजसेवियों को एक ऐसे मजबूत सूत्र
में पिरोएंगे, जहाँ
कोई भी खुद को बेबस या अकेला न समझे।
- सत्य व नैतिक पत्रकारिता का
समर्थन:
हम सच की लड़ाई लड़ने वाले हर उस योद्धा के साथ खड़े हैं जो समाज, देश और
लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालता है।
आइए, इस मंच से जुड़कर अपनी वास्तविक ताकत को पहचानें। जब तक
हमारी कलम में सच्चाई और नीयत में ईमानदारी है, दुनिया
का कोई भी षड्यंत्र हमें झुका नहीं सकता।
जय हिंद! जय भारत!
मुकेश कुमार कुशवाहा
संस्थापक
एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
ऑल
मीडिया प्रेस एसोसिएशन